Kaal Sarp Dosh Puja
"कालसर्प योग" सामान्यतः जन्म कुंडली के बाकी सात ग्रह राहु और केतु...
Pandit Nitesh Guru
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धार्मिक अनुष्ठानो में रूचि पंडित नितेश जी को बाल्यकाल से ही थी | पंडित जी ने शिक्षा ग्रहण गुरुकुल एवं ब्रह्म गायत्री मंदिर से की , आचार्य जी को समस्त प्रकार के अनुष्ठानो का प्रयोगात्मक ज्ञान एवं सम्पूर्ण विधि विधान कि जानकारी है आचार्य जी वैदिक अनुष्ठानो में एवं सभी प्रकार के दोष एवं बाधाओ के निवारण कार्य को करते हुए 13+ वर्ष से भी ज्यादा हो गया है अवंतिका पूजा केन्द्र जी प्राचीन समय से उज्जैन में किए गए सभी प्रकार के हिंदू आध्यात्मिक अभ्यासों और पूजाओं में रहे हैं। वर्तमान में पंडित जी उज्जैन नगरी में सर्वश्रेष्ठ विद्वानोँ की श्रेणी में आते है | वर्तमान में आचार्य जी द्वारा पूरी उज्जैन नगरी में कालसर्प पूजा एवं मंगल भात पूजा विशेष वैदिक पद्धति द्वारा पूजन सम्पन्न किया है इसके अतिरिक्त महामृत्युंजय जाप,दुर्गा सप्तसती पाठ भी करते है !
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"कालसर्प योग" सामान्यतः जन्म कुंडली के बाकी सात ग्रह राहु और केतु...
मंगल भात पूजा कुंडली में विद्धमान मंगल ग्रह की उग्रता को कम करने के लिए की जाती है।...
परेशानी वाली बात:- चंद्र-राहु या सूर्य-राहु की युति को ग्रहण योग कहते हैं। यदि बुध की युति राहु के साथ है...
पितृदोष और कालसर्पदोष का सबसे प्राचीन स्थान सिद्धवट घाट है यहीं पर पितरों को मुक्ति प्रदान होती है
हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण होती हैं।
कुंडली पूजा कुंडली में विद्धमान ग्रहों की उग्रता को कम करने के लिए की जाती है।...
सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा का बहुत ज्यादा महत्व है. मूर्ति स्थापना के समय प्राण प्रतिष्ठा जरूर किया जाता है.
महामृत्युंजय मंत्र जप शास्त्रों और पुराणों में असाध्य रोगों से मुक्ति और अकाल मृत्यु.
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने॥ प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:॥
मां राज राजेश्वरी बगलामुखी पूजन के द्वारा सभी शत्रु पर विजय एवं काम क्रोध आदि
दोषों की शांति और आध्यात्मिक संतुलन के लिए उपचारात्मक यज्ञ।
स्वर्णाकर्षण भैरव काल भैरव का सात्त्विक रूप हैं, जिनकी पूजा धन प्राप्ति के लिए की जाती है, यह हमेशा पाताल में रहते
ऋण मुक्ति पूजा एक हिंदू धार्मिक प्रथा है जिसमें ऋण बंधन से मुक्ति प्राप्त करने के लिए पूजा की जाती है।
दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है, उसे शतचंडी यज्ञ बोला जाता है।॥
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बनने वाले योग और दोष व्यक्ति के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
" अर्क विवाह से पुरुषों के विवाह में आ रहे समस्त प्रकार के दोषो से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है|..."
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